Friday, April 10, 2009

यादों का धुआँ

यादों का धुआँ आज फिर, मेरी पलकों से कुछ आँसू गिरा गया।
फिर वो भूली यादों का कारवाँ, मेरे आज से कुछ लम्हे चुरा गया।।
आज फिर कुछ लफ़्ज़ मेरे होंठो तक आकर रुक गए।
फिर कुछ कदमों के फ़ासले पर जाकर कदम मुड़ गए।।
आज फिर देखता हूँ मुड़कर शायद कोई पुकारता हो।
फिर कुछ अनकही बातें सुन लेने को कदम रुक गए।।
यादों का धुआँ आज फिर, उन्ही कदमों की आहट सुना गया।
यादों का धुआँ आज फिर, मेरी पलकों से कुछ आँसू गिरा गया।।

1 comment:

Bug said...

Design and shape may seduce,
but words are those sexy killers which made you cry most reasoniably, evoked emotional response.